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हाथ कागज

    
     
मुझे पता है कि हाथकागज, कागज की दैनिक बढ़ती मांग की आपूर्ति नहीं कर सकता है परंतु 70,00,00 गांवों में रहने वाली जनता हाथकागज के उपयोग से अपने हस्तशिल्प को एक नया रूप देना चाहती है, बशर्ते यह सहजता से प्राप्त हो।

- महात्मा गांधी
  हरिजन, 14 सितंबर 1934
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हमारे बारे में

➢ हाथकागज के बारे में

हाथकागज - पारिस्थितिकी और पर्यावरण का रक्षक


कागज एक अत्यंत बहु उपयोगी सामग्री है जो हमारी आधुनिक संस्कृति के सभी पहलुओं में पैठ बनाने में कामयाब रहा है एक लेखन सामग्री से लेकर सूचना देने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, उद्योग और शिक्षा इन सभी क्षेत्रों में इसका उपयोग अधिक होता है। आज हम कागज के बिना दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते लेकिन अगर हम कुछ शताब्दी पीछे जाते हैं तो हम पाते हैं कि इसका उपयोग बहुत कम होता था।
भारत में कागज उद्योग हाल ही के वर्षों के दौरान काफी हद तक विकसित हुआ है। यह बृहद उद्योगों में से एक हैं, जिसके अंतर्गत 760 लुगदी और पेपर मिल्स शामिल है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। भारत वैश्विक रूप से कागज के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और जब भी कागज के उत्पादन की बात आती है तो देश एक उत्साहवर्धक परिदृश्य सामने आता है। भारत में आर्थिक विकास के साथ कागज की खपत अथवा बिक्री में और अधिक वृद्धि होने की संभावनाएं दिखाई देती हैं।
भारत में महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ का गठन किया गया था। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था "गाँव भारत का दिल हैं" और यदि गाँव नष्ट होते हैं तो हमारा राष्ट्र भी नष्ट हो जाएगा। इसके साथ, लघु उद्योगों में से एक अर्थात हाथ कागज उद्योग ने गति पकड़ी है और अब यह हमारे देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तथापि, भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान मिल के कागजों के आयात के कारण इस समृद्धशाली शिल्प के लिए यह कठिन समय था और इसकी लगभग मृत्यु सी हो गई थी। इस शिल्प के बारे में सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि भारतीय उप-महाद्वीप में, हस्तनिर्मित कागज शिल्प केवल भारत में ही बच पाया था। महात्मा गांधी द्वारा पारंपरिक कागज़ियों की रक्षा के लिए एक पहल के साथ, 1935 में इस शिल्प को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए थे । इस समय कागज निर्माण से संबंधित उपकरण और उत्पादन तकनीक में सुधार करने और लोगों के लिए रोजगार के अवसर को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए गए।

➢ हाथकागज का इतिहास

हाथ कागज के बारे में बात करें तो इसका एक दिलचस्प इतिहास हैं अर्थात जब चीन ने 105 इसवीं में पहली बार कागज बनाने की तकनीक विकसित की थी। चीन में हान राजवंश के शासनकाल के दौरान, कै लुन ने बांस, चिथड़ों, पटसन, शहतूत के पेड़ की छाल, और मछली पकड़ने के जाल को एक साथ मिलाकर लुगदी बनाई और कागज प्राप्त करने के लिए इसे फैलाया और इस प्रकार कागज का आविष्कार हुआ। लुन ने नरम, लचीला, चमकदार और चिकना कागज बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों जैसे कि पेड़ों की छाल, फाइबर ऑफ वाइन्स का उपयोग किया और इसी तरह कागज का विकास हुआ। मिस्र में लेखन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शुरुआती पेपिरस से लेकर हॉलैंडर लोडर द्वारा तैयार लोकप्रिय पेपर तक हाथ कागज की यात्रा हजारों वर्षों की रही है ।
हस्तनिर्मित कागज एक प्रकार की जालीदार तंतुओं की एक परत होती है जो सेल्यूलोज द्वारा एक साथ जुड़े रहते हैं। इस उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की आवश्यकता बहुत अधिक होती है, क्योंकि इसका उत्पादन अपशिष्ट सामग्री का उपयोग करके किया जाता है। अतः यह एकमात्र ऐसा उद्योग है, जो कचरे या अपशिष्ट से अद्भुत वस्तु निर्माण का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस कागज की वास्तविक सुंदरता इसकी समृद्ध बनावट, चमक, संरचना और निर्माण में निहित होती है। हस्तनिर्मित कागज के उत्पादन के दौरान आसानी से प्राप्त फ़ाइबर का प्रयोग के द्वारा नए सृजन करने की असीम संभावना प्रदान करता है। हाथ कागज का बनाया गया प्रत्येक पीस का एक विशेष स्थान होता है और इसके निर्माता के लिए यह एक अद्भुत बात है क्योंकि प्राकृतिक और असली पंखुड़िया को तभी उसमें मिलाया जा सकता है, जब कागज को हाथ से बनाया जाए ।

➢ हाथकागज कागज उद्योग को पुनर्जीवित करने में खादी और ग्रामोद्योग आयोग की भूमिका

स्वतंत्रता के पश्चात, हाथ कागज उद्योग का सुनियोजित विकास सरकार के स्तर पर किया गया और इसे खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम, 1956 के तहत ग्रामोद्योगों की अनुसूची में शामिल किया गया । तब से हाथ कागज उद्योग ने 10,000 से अधिक लोगों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षित और अतिरिक्त आय अर्जित करने वाले लोगों के लिए रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने अपनी स्थापना के बाद हस्तनिर्मित और फाइबर उद्योग सहित ग्रामोद्योग को तकनीकी ज्ञान और विपणन सहायता प्रदान करने के साथ-साथ वित्तीय सहायता प्रदान करके इन्हें पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी ली है।
कार्यालयों द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले कागज के कचरे की मात्रा को कम करने के उद्देश्य से, खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने खादी हस्तनिर्मित कागज बनाया है। इस परियोजना से खादी का उद्देश्य मशीन-निर्मित कागज की आवश्यकता को कम करना है, जिससे वनों की कटाई की संभावना कम होगी।
हस्तनिर्मित कागज उद्योग को बढ़ावा देने के लिए और लोगों को प्राकृतिक वस्तुओं को अपनाने एवं इस पर्यावरण अनुकूल कागज का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु खादी और ग्रामोद्योग आयोग विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और घरेलू व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और अपने विविध हस्तनिर्मित कागज और इसके उत्पादों को प्रदर्शित कर रहा है। ट्रेड फेयर में प्रदर्शन करने से व्यवसाय अथवा कारोबार में वृद्धि से एक विशाल ग्राहक डेटाबेस बनाने के लिए अवसर प्राप्त होंगे । खादी और ग्रामोद्योग आयोग हाथकागज और रेशा आधारित उद्योग और कागज के उत्पादन में शामिल ग्रामीण श्रमिकों को लाभ पहुंचाने में अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहा है ।

➢ हाथ कागज का महत्व

पर्यावरण और पृथ्वी की रक्षा करने के लिए कार्बन फुटप्रिंट को कम करना एकमात्र तरीका है। आकड़ों के अनुसार कागज अथवा पेपरबोर्ड के 1 टन के निर्माण के लिए पेपर मिलों को 2.5 से 3 टन शुष्क वन आधारित सामग्री की आवश्यकता होती है और पेड़ों की भारी कटाई के कारण वन संपदा कम हो रही है एवं पारिस्थितिक असंतुलन का कारण बन रही है।
इस कारण से पारंपरिक कागज को हाथकागज से बदलने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

1. इस कागज को पुर्नचक्रित किया जा सकता है
हाथ कागज उद्योग भारत के प्राचीन शिल्पों में से एक है। जहां अन्य भागों में हाथ कागज बनाने में कच्चे माल के रूप में बाँस यूकेलिप्टस और अन्य वन आधारित लकड़ी के रेशों का उपयोग होता है, वहीं खादी और ग्रामोद्योग के हाथ कागज को 100% कॉटन रैग और गैर-लकड़ी के कच्चे माल जैसे कि होजरी कटिंग, जूट वेस्ट,घास, कृषि अपशिष्ट, चावल का भूसा, केला फ़ाइबर आदि से बनाया जाता है। प्रत्येक फ़ाइबर का अपना गुण होता है और हाथ कागज निर्माण में उसका अपना महत्व होता है।
अतः हाथ कागज न केवल पेड़ों और वातावरण को संरक्षित कर रहा है, अपितु अपशिष्ट को अद्भुत संभावनाओं में बदल रहा है।

2. अपसाइकल किया जा सकता है
हाथकागज को न केवल रिसाइकल किया जा सकता है, अपितु इसे अपसाइकल भी किया जा सकता है। हाथकागज के निर्माण में कॉटन से लेकर केले तक के कई प्रकार के फेंके हुए फाइबर का उपयोग किया जाता हैं। आमतौर पर ये अपशिष्ट पदार्थ अपशिष्ट ढ़ेर में मिलकर अपशिष्ट संबंधी समस्या को बढ़ाने का काम करते हैं परंतु अपसाइक्लिंग विधि द्वारा इस समस्या को अच्छी तरह से प्रबंधित किया जा सकता है। फ़ाइबर को अलग और सुव्यवस्थित करने के लिए श्रमशक्ति की आवश्यकता होती है। अतः यह ग्रामीण लोगों को रोजगार प्रदान करने का अच्छा तरीका हो सकता है

3. पर्यावरण अनुकूल
जैसा कि यह रिसाइकल और अपसाइकल सामग्रियों से बना होता हैं, अतः हाथकागज बनाने के लिए किसी पेड़ को काटने की जरूरत नहीं होती है यह इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है और साथ ही साथ इसके निर्माण और सुखाने की प्रक्रिया में व्यापक सौर ऊर्जा का उपयोग होता है, जो कि प्रदूषण मुक्त विधि हैं, दूसरे शब्दों में यह भविष्य का कागज है।

4. प्रदूषण मुक्त विधि
मशीन से बने कागज के निर्माण के दौरान, कागज को मुलायम बनाने और रंग देने के लिए बड़ी संख्या में रसायनों का उपयोग किया जाता है। इसके विपरीत,हाथ कागज बनाने में किसी भी जहरीले रसायनों की आवश्यकता नहीं होती है। अतः हाथ कागज न केवल प्रदूषण को कम करता है, अपितु प्राकृतिक संसाधनों को भी बचाता है और एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए योगदान देता है।

5. दुर्लभ और सुंदर उत्पाद
हाथकागज की सुंदरता और इसकी मजबूती सृजनात्मकता का पता लगाने के लिए अवसर प्रदान करती है। हाथ कागज का उपयोग विभिन्न प्रकार के उत्पादों जैसे कि लालटेन, फोटोफ्रेम, लिफाफे, बैग, डाइरी, गिफ्ट बॉक्स, घर सजावट के सामान और बहुत कुछ बनाने के लिए किया जा सकता है।

➢ संभावनाएं और विशेषताएं

हाथ कागज निर्माण इकाइयों में कागज का उत्पादन हाथ से (मेन्यूअली) किया जाता है। इनका उत्पादन शुद्ध सेल्युलोसिक सामग्री या कच्चे माल का उपयोग करके किया जाता है। हाथ कागज के उत्पादन में मेकेनिकल पल्पिंग विधि का उपयोग किया जाता है, जबकि मशीन से बनाए जाने वाले पेपर में रासायनिक विधि का उपयोग किया जाता है ।
हाथ कागज उद्योग में विशेष रूप से गैर-वन सामग्री का उपयोग करता है, जिसमें प्रमुख रूप से सेलूलोज समृद्ध कच्चा माल अर्थात वेस्ट पेपर और कॉटन रैग शामिल हैं । हाथ कागज का उत्पादन प्लांट में ही रिसाइक्लिंग की संभावनाएं प्रदान करता है। ऐसे उद्योग जिनमें कागज का अधिक उपयोग होता हैं उन उद्योगों से निकलने वाले कचरे को आसानी से रिसाइकल किया जा सकता है। हाथ कागज में व्यापक संभावनाओं के साथ कुछ अनूठी विशेषताएँ पाई जाती हैं:-

i) हाथ कागज की सतह उत्कृष्ट होती है जो कागज की सुंदरता को बढ़ाती है और इसे विशिष्ट रूप देती है।

ii) हाथ कागज पर्यावरण अनुकूल होने के अलावा गुणवत्तायुक्त भी होता है। यह कागज पारंपरिक कागज की तुलना में अधिक खिचावदार होता है और दोहरी परत के कारण इसे फाड़ना आसान नहीं है।

iii) यह कागज नष्ट नहीं होता है और स्थायी होता है।

iv) यह दीर्घकाल तक रहने वाला कागज है और यह समय के साथ पतला नहीं होता है।

v) इसमें प्रदूषण रहित विधि शामिल है अर्थात सौर ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।

ढांचागत सहयोग

प्रत्येक ढांचे के लिए एक अच्छी आधारभूत सुविधा की आवश्यकता होती है और जब एक अच्छी हाथ कागज इकाई की बात हो तो इसके लिए आधारभूत सुविधा जैसे कि मीठे जल की उपलब्धता, 3 फेज इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई और वर्कशॉप की आवश्यकता होती है। हाथ कागज उद्योग प्रमुख रूप से श्रम प्रधान उद्योग है इसका अर्थ यह है कि कम मजदूरी पर श्रम की उपलब्धता इस उद्योग की एक बड़ी जरूरत है । श्रमिकों के कौशल और क्षमता के आधार पर उद्योग उन्हें प्रतिदिन रु. 60 से लेकर रु.150 तक का भुगतान करता है । हाथ कागज उद्योग कुल कार्यबल की 40 प्रतिशत की सीमा तक महिला श्रमिकों को नियुक्त करता है ।

परियोजनाएं:

1. हाथकागज इकाई (हैंड लिफ्टिंग)
2. सिलेंडर मोल्ड हैंडमेड पेपर इकाई
3. पेपर कन्वर्जन इकाइयां
   क) एक्सर्साइज़ नोट बुक इकाई
   ख) फ़ाइल कवर / बोर्ड मेकिंग इकाइयां
   ग) एनवलप मेकिंग इकाई
   घ) पेपर बैग/लेटर हैड/ग्रीटिंग विजिटिंग कार्ड आदि ।


हाथ कागज उद्योग में कारख़ाना अधिनयम और अन्य श्रमिक क़ानूनों के प्रावधान लागू होते हैं और इस अधिनियम के अंतर्गत यह श्रमिकों को मिलने वाले अनुषंगी लाभ भी प्रदान करता है ।

➢ उत्पादन के लिए कच्चा माल

हाथ कागज के उत्पादन हेतु विभिन्न प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता होती है, जो ज़्यादातर कृषि और कपड़ा अपशिष्ट होते हैं और जिनका उपयोग किसी अन्य सामान्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता । उत्पादन प्रक्रिया के लिए आवश्यक कच्चे माल में निम्नलिखित शामिल हैं :
  • कॉटन रेग्स
  • सबई घास
  • सन हेम्प
  • केले का रेशा
  • सिसल फ़ाइबर
  • भूसा
  • कपड़े की कतरन
  • अन्य सेल्यूलोसिक फ़ाइबर

➢ उत्पादन प्रक्रिया

हाथकागज के उत्पादन में शामिल प्रक्रिया निम्नानुसार है :

i) सॉर्टिंग और डस्टिंग
हाथ कागज इकाइयां कच्चे माल की छँटाई के लिए सॉर्टिंग विधि को अपनाती है जो पहले उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग की जाती थी । डस्टिंग विधि कच्चे माल में मिश्रित अनावश्यक सामग्री को हटाने के लिए हाथ से छाँटने की एक विधि है ।

ii) कटिंग
इस प्रक्रिया को रैग चापिंग के नाम से भी जाना जाता है जहां छुरे का उपयोग कच्चे माल की लंबाई को काटने या कम करने के लिए किया जाता है । छोटे टुकड़ों में काटा गया कच्चा माल लुगदी बनाने के लिए उपयुक्त होता है अन्यथा पल्पिंग प्रक्रिया में समय लगता है और लुगदी की वांछित गुणवत्ता भी प्राप्त नहीं होगी । काटने की प्रक्रिया के दौरान कॉटन रैग्स को एक मेकनिकल रेग चॉपर में डाला जाता है, जो रैग्स को छोटे और समान टुकड़ों में काट देता है। प्रत्येक हाथ कागज उद्योग में काटने की प्रक्रिया के लिए एक चॉपर मशीन होती है ।

iii) भिगोना
कच्चे माल को भिगोने का मुख्य उद्देश्य धूल कणों को हटाना और सामग्री को मुलायम करना है। भिगोने की प्रक्रिया फाइबर को साफ करने और उसकी कठोरता को कम करने में भी मदद करती है।

iv) लुगदी बनाना और आकार देना
यह हाथकागज के उत्पादन में शामिल महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। इस प्रक्रिया में कच्चे माल को लुगदी में बदलने के लिए बीटर मशीन की आवश्यकता होती है। लुगदी बनाने की प्रक्रिया के दौरान कच्चे माल को एक स्टॉक में परिवर्तित किया जाता है अर्थात इसके प्रारंभिक चरण में अर्ध तैयार लुगदी। इस प्रक्रिया को तब तक जारी रखा जाता है जब तक कि अर्ध-तैयार लुगदी एक अच्छी गुणवत्ता वाली लुगदी में परिवर्तित नहीं हो जाती । रंगीन या विभिन्न बनावट वाले हाथकागज का निर्माण करते समय रंग रंजक और बनावट की सामग्री जैसे जूट, फाइबर, घास, पुआल, आदि को भी शामिल किया जाता है।

v) लिफ्टिंग
लिफ्टिंग की प्रक्रिया एक आधुनिक विधि है, जिसमें डिप वेट्स की आवश्यकता होती है और मोल्ड लिफ्ट करने के लिए एक उपकरण के साथ लगे स्टील वाटर टैंक का उपयोग किया जाता है। फिर मोल्ड को पानी की टंकी में दो लकड़ी के तख्ते के बीच बांध दिया जाता है। फिर कागज की मोटाई के आधार पर एक निश्चित मात्रा में लुगदी को मोल्ड में डाला जाता है, जो फाइबर की क्रॉस लिंकिंग को सुनिश्चित करने के लिए क्षैतिज रूप से एक एक करके दायीं व बायीं ओर हिलाया जाता है। तत्पश्चात मोल्ड के ऊपर लुगदी की शीट बनाई जाती है, जिसे फ्रेम को हटा कर निकाला जाता है।

vi) प्रेसिंग
गीली शीटस उठाने के बाद इसे प्रेसिंग की प्रक्रिया के लिए ले जाया जाता है, जहां मैनुअल प्रेस द्वता शीट से अतिरिक्त पानी को निचोड़ा जाता है और फाइबर को मजबूत बनाने के लिए लुगदी को प्रैस किया जाता है। यह प्रक्रिया गीली चादरों से लगभग 50 प्रतिशत पानी हटा देती है। । यदि अतिरिक्त पानी को नहीं हटाया जाता है तो उत्पादित कागज कैलेंडरिंग प्रोसेस के लिए उपयुक्त नहीं होगा।

vii) सुखाना
प्रक्रिया के अगले चरण में सुखाने की विधि शामिल है, जहां प्रैस की गई शीट्स को काऊचिंग क्लोथ से अलग किया जाता है और घर के अंदर सुखाने के लिए या सुखाने वाले कक्षों में रखा जाता है, जिसमें एस्बेस्टस की छत और दो शेड होते हैं। रंगीन शीट्स को आमतौर पर दोनों तरफ एक समान रंग प्राप्त करने के लिए छाया में सूखने के लिए रखा जाता हैं। एक बार सुखाने की प्रक्रिया समाप्त हो जाने पर शीट्स को कैलेंडरिंग प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है।

viii) कैलेंडरिंग
कैलेंडरिंग विधि का उपयोग कागज की सतह को समतल और एक समान बनाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, प्रत्येक शीट को धातु की प्लेटों के बीच रखा जाता है और कैलेंडरिंग मशीन में स्प्रिंग लोडेड रोलर्स से भेजा जाता है। जब शीट रोलर से गुजरती है, तो इसके भारी दबाव के कारण यह कागज को चिकना और एक समान बनाता है।

ix) कटिंग एवं पैकिंग
कटिंग हस्तनिर्मित कागज उत्पादन प्रक्रिया का अंतिम चरण है। कैलेंडरिंग प्रक्रिया के पश्चात कागज में अभी भी बिना काटा खुरदरा हिस्सा रह जाता है, जिसे फिर एक कटिंग मशीन का उपयोग करके 22 x 30 या 56 x 76 के मानक आकार में काट दिया जाता है। हालांकि, अगर खरीदार ऑर्डर में माप निर्दिष्ट करता है तो इकाई द्वारा आवश्यक आकार की आपूर्ति करनी चाहिए ।

➢ प्रॉडक्ट रेंज

खादी और ग्रामोद्योग की हाथकागज इकाइयां पर्यावरण अनुकूल और अद्वितीय हाथकागज उत्पादों की उत्तम श्रेणी का निर्माण और निर्यात करती हैं। हमारे उत्पाद रेंज में हस्तनिर्मित ड्राइंग शीट, कार्ड शीट, सिल्कन पेपर, बॉन्ड पेपर, मार्बल पेपर और अन्य किस्म भी शामिल हैं। इसके अलावा, खादी और ग्रामोद्योग आयोग वॉटरमार्क पेपर, फाइल कवर पेपर, इंसुलेशन पेपर, इंडस्ट्रियल फिल्टर पेपर इत्यादि का भी निर्माण करता है, जो संस्थाओं या सरकारी क्षेत्रों द्वारा प्रमुखता से उपयोग किया जाता है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग की हाथकागज इकाइयों में उत्पादित प्रत्येक उत्पाद हाथकागज इकाइयों में काम करने वाले हमारे कर्मियों की कुशलता का प्रतीक है और निर्माता के लिए अपनी प्रत्येक वस्तु अद्वितीय होती है।

हाथकागज निर्माण के लिए प्रशिक्षण

तथापि, पूरे देश में कई हाथकागज विनिर्माण इकाइयां हैं, लेकिन प्रशिक्षण और अन्य विशेषज्ञता की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कई विनिर्माण इकाइयों को निर्यात की मांग को पूरा करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं। इन चुनौतियों का सामना करने हेतु निम्नलिखित संस्थाओ में हाथ कागज बनाने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

➢ प्रशिक्षण संस्थान

1. कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट, सांगानेर,

यह संस्थान भारत के हाथकागज उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए यूएनडीपी तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग की तकनीकी सहायता से सांगानेर, जयपुर, राजस्थान में स्थापित किया गया था।
इसे 1997 में रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया है। यह संस्थान हाथकागज़ उद्योग के तहत जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करता है।
परियोजना उत्पाद विकास के लिए अनुसंधान और विकास कार्य, प्रशिक्षण और पायलट संयंत्र के लिए बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित है। यह हाथकागज इकाइयों की स्थापना के लिए जरूरतमंद उद्यमियों को परामर्श संबंधी सेवाएँ प्रदान करता है।
दिनांक 18.08.97 को संस्थान को सीधे सहायता प्राप्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया है। चेयरमैन , खादी और ग्रामोद्योग आयोग इसके अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी खादी और ग्रामोद्योग आयोग उपाध्यक्ष हैं।
केएनएचपीआई, जयपुर हाथकागज एवं रेशा आधारित इकाइयों को प्रशिक्षण एवं अनुसंधान एवं विकास संबंधी गतिविधियों, और प्रौद्योगिकी प्रसार कार्य के लिए परीक्षण सुविधाएं प्रदान कर रहा है। संस्थान खादी और ग्रामोद्योग आयोग के एस एंड टी कार्यक्रम के तहत नियमित रूप से नई तकनीकों पर शोध कार्यक्रम चला रहा है।
संस्थान विभिन्न लंबी अवधि के साथ-साथ अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है।

2. हाथकागज संस्थान के.बी. जोशी रूपायनर्ड, शिवाजीनगर, पुणे:

क्षमता निर्माण निदेशालय के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के तहत हाथकागज प्रशिक्षण के लिए एक अग्रणी संस्थान में से एक है । लोगों को प्रशिक्षित करने और मशीन-निर्मित कागज के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले विभिन्न प्रकार के कागज का उत्पादन करने हेतु हाथकागज इकाई स्थापना करने का जो सपना महात्मा गांधी ने देखा था उस सपने को पूरा करने के लिए 1940 में नेहरू जी द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था। प्रशिक्षुओं को व्यावसायिक उत्पादन से परिचित कराने के लिए इस संस्थान का एक उत्पादन केंद्र भी है ।
यह संस्थान तकनीकी प्रबंधकों के रूप में काम करने और गुणवत्ता नियंत्रण आदि बनाए रखने हेतु सभी राज्यों के उम्मीदवारों को स्टाइफंडरी केटेगरी के तहत प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रबंधकीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हाथकागज उद्योग के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से शामिल किया गया है। संस्थान कार्यक्रम के लिए आवश्यक सभी अवसंरचनात्मक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें प्रबंधकीय प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सुविधाओं जैसे कि अनुसंधान प्रयोगशाला, उत्पाद विकास, विस्तार, छात्रावास सुविधाएं, पुस्तकालय इत्यादि भी शामिल हैं। खादी और ग्रामोद्योग आयोग हाथकागज और रेशा आधारित उद्योग को प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। । यह इकाई महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड, मुंबई के अधीन काम कर रही है।
इस संस्थान में वर्ष 1956 से मुख्य रूप से हाथकागज उद्योग से संबंधित 1 वर्ष की अवधि की प्रबंधन पाठ्यक्रम और कागज कनवर्ज़न में भी प्रशिक्षण दिया जाता है ।

3. डॉ. बी.आर.अंबेडकर ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, नाशिक:

डॉ बी.आर.अंबेडकर ग्रामीण प्रौद्योगिकी संस्थान, नाशिक एक विभागीय प्रशिक्षण केंद्र है ।
केंद्र में पेपर कनवर्ज़न , स्क्रीन प्रिंटिंग और फैंसी फाइबर आर्टिजन कोर्स आयोजित किए जा रहे हैं।

➢ प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सूची

हाथकागज इकाई की स्थापना

➢ इकाई स्थापित करने हेतु प्रक्रिया

हाथकागज इकाई को न्यूनतम अवधि में स्थापित करने के लिए निम्नलिखित चरणों की आवश्यकता होगी:

i. कार्यान्वयन अभिकरण को पेशेवर सलाहकारों जैसे कि चार्टर्ड अकाउंटटेंट और अन्य की मदद से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए, जिसमें उन्हें आवश्यक संयंत्र के प्रकार का उल्लेख करना चाहिए । इसके पश्चात रिपोर्ट उनके बैंकरों/खादी और ग्रामोद्योग आयोग के विचारार्थ प्रस्तुत की जानी चाहिए ।

ii. अभिकरण वित्तीय सहायता के लिए बैंक से सहमति प्राप्त करने के पश्चात, नियमानुसार उल्लिखित मार्जिन राशि का लाभ प्राप्त के लिए राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड या राज्य कार्यालय खादी और ग्रामोद्योग आयोग से संपर्क अथवा जानकारी प्राप्त कर सकता है।

iii. इकाई का निर्माण शुरू करने से पूर्व, बोरवेल की खुदाई करके पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए बिजली की आपूर्ति हेतु विद्युत बोर्ड से सहमति पत्र लेना चाहिए।

iv. इकाई के गंदे पानी के प्रवाह का परीक्षण करने के लिए क्षेत्रीय जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनंतिम अनुमति लेनी चाहिए ।

v. इकाई को चलाने और हाथकागज विनिर्माण के लिए, कुछ कर्मियों को उत्पादन गतिविधियों को शुरू करने से पूर्व कारीगर प्रशिक्षण के लिए प्रतिनियुक्त किया जाना चाहिए ।

➢ हाथकागज इकाई को मान्यता प्रदान करना

हाथकागज इकाई को स्थापित करने के लिए, खादी और ग्रामोद्योग आयोग मान्यता प्रमाण पत्र जारी करता है जो यह प्रमाणित करता है कि हाथकागज इकाई अनुमोदित पैटर्न अनुसार वास्तविक हाथकागज का उत्पादन कर रही है । यह प्रमाण पत्र केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अध्याय 48 और आर्टिकल 4802-20 के अनुसार विनिर्माण इकाइयों को उत्पाद शुल्क में छूट प्रदान करता है । मान्यता प्रमाणपत्र निम्नलिखित मानदंडों के तहत जारी किया जाता है:


• कागज और पेपरबोर्ड का विनिर्माण करते समय लुगदी उठाने की प्रक्रिया मैन्युअल रूप से की जाएगी।

• बिजली चालित फोर्मिंग मशीन का उपयोग करते समय, शीट उठाने का कार्य हाथ से किया जाएगा और फेस लेंथ केवल 40’’ तक ही सीमित है।

• एक बार मान्यता प्रमाण पत्र जारी होने के पश्चात हाथकागज इकाई और उसके उत्पादों पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता है । हाथकागज और रेशा आधारित उद्योग निदेशालय खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा जारी निर्देशों तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अध्याय 48 के अनुरूप वास्तविक विनिर्माण इकाइयों को मान्यता प्रमाण पत्र जारी करता है ।

• खादी और ग्रामोद्योग आयोग के राज्य/ क्षेत्रीय निदेशकों के पास हाथकागज इकाइयों को मान्यता प्रमाण पत्र जारी करने की शक्तियां निहित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी विनिर्माण इकाइयाँ, खादी और ग्रामोद्योग आयोग से सहायता प्राप्त इकाइयाँ, आरईजीपी इकाइयाँ और अन्य वित्तीय अभिकरणों द्वारा वित्तपोषित इकाइयाँ भी मान्यता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।

रोजगार के अवसर

हाथकागज उन महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है जो अकुशल और अर्ध-कुशल लोगों के लिए रोजगार का सृजन करता है और उन्हें उनके तकनीकी ज्ञान और क्षमता के आधार पर आय का एक नियमित स्रोत प्रदान करता है। यह युवाओं के बीच उद्यमशीलता विकसित करने में भी मदद करता है, कचरे को रीसायकल करने और बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उत्पादन करने में मदद करता है। एक पर्यावरण अनुकूल उत्पाद होने के नाते, हाथकागज की न केवल भारतीय बाजार में अपितु अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी मांग है । हाथकागज सेक्टर एक उद्योग के रूप में विकसित हुआ है और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी ) के माध्यम से इस उद्योग को बढ़ावा दे रहा है। इसकी मांग में वृद्धि होने से इस उद्योग ने रोजगार के अधिक अवसर पैदा करना शुरू कर दिया है। हाथकागज बनाने की आसान प्रक्रिया के कारण यह उद्योग देश के कई राज्यों में फल-फूल रहा है।
हाथकागज उत्पादन में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। उत्पादन मात्रा बढ़ने पर अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। हाथकागज का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसकी इकाई को रोजगार सृजन के लिए बड़ी इकाई के लिए आवश्यक पूंजी का केवल दसवां हिस्सा चाहिए।
हाथकागज का प्रत्येक समान जो हम खरीदते हैं, उसके पीछे एक कहानी होती है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग का हाथकागज आदिवासी महिलाओं द्वारा अपने पारंपरिक अनुकल्प का उपयोग करके बनाया गया है। अतः हर एक खरीद कई कारीगरों की स्थायी आजीविका में योगदान करती है।

➢ विनिर्माण इकाइयों की सूची

➢ हाथकागज की बाजार क्षमता

आधुनिक सभ्यता में कागज का बहुत बड़ा महत्व है । पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ हाथकागज उद्योग में वृद्धि हुई है । हाथकागज (एचएमपी) उद्योग के पास न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भी जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादों की एक विविध रेंज है। साक्षरता के बढ़ने, औद्योगीकरण और आधुनिकीकरण के कारण हाथकागज की प्रति व्यक्ति खपत में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है। इस उद्योग के कुछ उत्पादों की बाजार में भारी मांग है जैसे बैग, स्टेशनरी आइटम, फोटो फ्रेम, ड्राइंग पेपर, सजावटी सामान आदि । हाथकागज के प्रमुख उपभोक्ता सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, होटल उद्योग, प्रिंटिंग प्रेस, निर्यात एजेंसियां आदि हैं और यह उद्योग प्रतिस्पर्धी दर पर अपने उत्पाद की आपूर्ति करने की स्थिति में हैं। उद्योग वॉटरमार्क पेपर जैसे उत्पादों का भी उपयोग करता है जिसका उपयोग डिग्री और शेयर प्रमाणपत्र, लेटरहेड और एंवलप के बांड पेपर के लिए किया जाता है। सभी आइटम छोटे हाथकागज इकाइयों में उत्पादित किए जाने के लिए उपयुक्त हैं। हाथकागज उद्योग प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित लगभग 10,000 लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है।

➢ अंतराष्ट्रीय बाजार

हाथकागज उद्योग भारत के सबसे अधिक निर्यात उन्मुख क्षेत्रों में से एक है । ‘इको-फ्रेंडली पेपर’ कहे जाने वाले और इसके पर्यावरण अनुकूलता के प्रति वैश्विक जागरूकता के कारण इस कागज की मांग बहुत बढ़ रही हैं । प्रकृति के परिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखना आज की जरूरत है और इसके लिए पर्यावरण अनुकूल उत्पाद सर्वोत्तम उपायों में से एक है । कपास और अन्य अपशिष्ट से कागज विनिर्माण में रिसाइक्लिंग प्रक्रिया भी शामिल है । हाथकागज उद्योग एक ऐसा क्षेत्र है जो पर्यावरण के अनुकूल उद्योग प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करता है और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखता है । इन सभी बिंदुओं के साथ, हाथकागज विनिर्माण इकाइयां ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत भी है । यह अनुमान है कि इकाई प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50-60 श्रमिकों को रोजगार प्रदान करती हैं और देश की रोजगार से संबंधित समस्या का हल करने एवं पर्यावरण की रक्षा करने में एक अभिन्न भूमिका निभाती है और उद्यमियों को पर्यावरण अनुकूल कागज का निर्यात करके विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करता है । खादी और ग्रामोद्योग आयोग अपनी विभिन्न विनिर्माण इकाइयों के साथ- साथ निर्यात करने वाले व्यापारियों के माध्यम से हाथ कागज का निर्यात कर रहा है । वर्तमान में, प्रमुख खरीदार देश हैं: यूएसए, जर्मनी, यूके, इटली, फ्रांस, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, हॉलैंड, न्यूजीलैंड, जापान, कनाडा, खाड़ी देशों और कई अन्य देश ।

➢ विपणन गतिविधियां

व्यापार मेले (प्रदर्शनी)

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में पेपरेक्स जैसे अंतराष्ट्रीय व्यापार मेलों में हाथकागज और रेशा आधारित उद्योग निदेशालय की सक्रिय भागीदारी से अंतराष्ट्रीय क्षेत्र में भारतीय हाथकागज की हिस्सेदारी में काफी वृद्धि हुई है । प्रदर्शनियों में भाग लेने से हाथकागज इकाइयों को निर्यात उन्मुख बनने में काफी मदद मिलती है । खादी और ग्रामोद्योग के तहत कई इकाइयों ने भारत और जर्मनी, चिली, यूके, स्विजरलैंड, पेरु आदि देशों में अंतराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लिया है । विभिन्न प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं में भाग लेने का उद्देश्य घरेलू और निर्यात बाज़ार में अपार संभावनाओं वाले इस पर्यावरण अनुकूल कागज के संबंध में जागरुकता पैदा करना है ।

उत्पाद विशिष्ट प्रदर्शनियों का आयोजन

हाथकागज और रेशा आधारित आधारित उद्योग निदेशालय पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित सभी महानगरों और चयनित शहरों में उत्पाद विशिष्ट (हाथकागज और कागज उत्पाद) प्रदर्शनी का आयोजन करता है। निदेशालय दिल्ली में पेपरेक्स और मुंबई में गिफ्टेक्स जैसी नियमित रूप से प्रदर्शित प्रदर्शनियों में भाग ले रहा है । प्रत्येक प्रदर्शनी में लगभग 30 से 40 हाथकागज और रेशा विनिर्माण इकाइयां भाग लेती है और अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय बाजारों में प्रदर्शित करती हैं । इन सभी क्रेता-विक्रेता सम्मेलन सह प्रदर्शनी को उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिल रही है ।

हाथकागज बिक्री केंद्र, विले पार्ले, मुंबई

यह हाथकागज एवं रेशा आधारित उद्योग निदेशालय का एक विभागीय ट्रेडिंग सेंटर है, जो मान्यता प्राप्त विपणन इकाइयों को विपणन सुविधाएं प्रदान करता है । यह इकाई एक्सपोर्ट हाउसों की आवश्यकताओं को भी पूरा करती है । इनके पास उचित दरों पर हाथकागज और इसके उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला है ।

क्र. सं.

ग्राहक

उत्पाद का प्रकार

1.

स्कूल,कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थान

वॉटरमार्क के साथ अथवा इसके बिना डिग्री और प्रमाण-पत्र बनाने वाले कागज, हाइ स्ट्रेंथ एनवलप पेपर पॉकेट, प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड, बॉटनी विभाग के लिए हर्बेरियम शीट,हाइ स्ट्रेंथ पेपर कवर पेपर

2.

तकनीकी संस्थाएं, कला संग्रहालय और अन्य उच्च स्तर के तकनीकी संस्थाएं

ड्राइंग पेपर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पेपर, डिज़ाइनिंग चार्ट

3.

केंद्र और राज्य सरकार के संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बैंक, रेलवे इत्यादि

फ़ाइल कवर, फ़ाइल बोर्ड, लिफाफे,पैकेट, लेटर हैड पेपर,विजिटिंग कार्ड पेपर, लेजर पेपर, बुक कवर, रैपिंग पेपर इत्यादि । राज्य बीज और केंद्रीय बीज विकास निगम के लिए पैकिंग पेपर ।

4.

डिस्टिलरी,फर्मास्यूटिकल्स,केमिकल इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज़

फ़िल्टर पेपर, फ़िल्टर पैड, इलेक्ट्रिकल इन्स्युलेशन प्रेस बोर्ड

5.

डिपार्टमेंटल स्टोर्स और स्टेशनरी डीलर

ड्राइंग पेपर और पैड , कलर कार्डस, कंवर्टेड आइटम जैसे ड्राइंग पैड, लेटर हेड, विजिटिंग कार्ड

6.

डिज़ाइनर और इंटिरियर डेकोरेटर्, सिविल कांट्रैक्टर्स, शू मेकर्स

आंतरिक सजावट हेतु डिज़ाइनरों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले व्हाइट बोर्ड, मून रॉक और अन्य फिनिश पेपर, जूता निर्माताओं के लिए हाइ स्ट्रेंथ स्टिफ बोर्ड, सिविल कांट्रैक्टर्स द्वारा सिविल कार्यों को करने के लिए सहायक के रूप में उपयोग करने हेतु केले के तने से बना बोर्ड, पार्टिशन वाला बोर्ड, फाल्स सीलिंग बोर्ड, एकोस्टिक बोर्ड

7.

बीमा कंपनी, बैंक, औद्योगिक घराना और कृषि विभाग

बीमा पॉलिसियों के लिए कागज, दीर्घकालिक जमा राशियों के लिए टिकाऊ और मजबूत कागज

8.

राज्य और केंद्रीय अभिलेखागार विभाग और संग्रहालय

अभलेखीय विभागों और संग्रहालय के पुराने और नाजुक दस्तावेजों को फटने से बचाने हेतु केले के रेशों से बना टिशु पेपर से लेमिनेशन करना । यह पेपर पारदर्शी होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने अथवा टिकने वाले होते हैं ।


गैलरी

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:-

निदेशक
हाथकागज और रेशा उद्योग
फोन नंबर : 022-26710526
ई-मेल : hmpfi.kvic@gov.in

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